अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस
"औरत ही सभी समस्याओं की जड़ है..."
जड़ तो है बेशक है लेकिन समस्याओं की नहीं, बल्कि दुनिया की प्रत्येक घटनाओं की। अपितु हम और आप यहां न होते, मैं यूँ लिख नहीं रहा होता और आप इतने बिंदास पढ़ नहीं रहे होते। जीवन के प्रत्येक पड़ाव के प्रत्येक घटना में सिर्फ और सिर्फ औरत का ही हाथ होता है—एक घर बनाने से लेकर एक इंसान बनाने तक।
आज मैं जो यहां पर हूँ, एक औरत का ही हाथ है। उसने दर्द सह कर मुझे दुनिया दी। मैं रोज गलतियां करता हूँ, उसको डांटता हूँ, लेकिन मुझे वो रोज चाय लाकर देती है। मम्मी से मेरी गलतियां छुपाती है, पापा से मुझे बचाती है—वह मेरी बहन ही है जो मुझे पहले मारती है फिर मनाती है।
वो औरत ही है जो घर की मान-मर्यादा को कायम रखने के लिए खुद को अनजान परिवार को सौंप आती है। हर बाप और बेटे की कामयाबी के पीछे वो ही होती है। उसे डर नहीं किसी का, वो हर हालत में पहाड़ भी चढ़ जाती है। बेशक कितनी भी अनपढ़ हो, घर में कोई बीमार हो तो खुद डॉक्टर भी बन जाती है।
वो कभी IPS तो कभी IAS बन जाती है। डरता है पूरा मोहल्ला उनसे जब भी गली में 'हिटलर दीदी' आती है। वह कभी माँ बनकर खिलाती है, कभी बहन बनकर गलतियाँ छुपाती है, तो कभी एक दोस्त बनकर मुस्कुराना सिखाती है।
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः ।। अर्थात जहाँ स्त्रियों की पूजा होती है वहाँ देवता निवास करते हैं। जहाँ उनका सम्मान नहीं होता, वहाँ समस्त अच्छे कर्म निष्फल हो जाते हैं।
न शोचन्ति तु यत्रैता वर्धते तद्धि सर्वदा ।। अर्थात जिस कुल में स्त्रियाँ कष्ट भोगती हैं, वह कुल नष्ट हो जाता है और जहाँ स्त्रियाँ प्रसन्न रहती हैं, वह कुल सदैव समृद्ध रहता है।
महिलाओं को कोटि-कोटि नमन।
मुसाफ़िर निज़ाम (Musafir Nizam)